एक समय की बात है, जब माता पार्वती भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या कर रही थीं। लेकिन भगवान शिव गहरे ध्यान (समाधि) में लीन थे और उन्हें किसी भी चीज़ का एहसास नहीं था।
देवताओं को चिंता हुई कि यदि शिव जी का ध्यान नहीं टूटा, तो संसार का संतुलन बिगड़ सकता है। तब उन्होंने कामदेव (प्रेम के देवता) से मदद मांगी।
कामदेव ने अपनी पुष्प-बाण (फूलों का तीर) चलाकर शिव जी के ध्यान को भंग करने की कोशिश की। जैसे ही वह तीर लगा, भगवान शिव का ध्यान टूट गया… लेकिन वे बहुत क्रोधित हो गए।
🔥 क्रोध में आकर शिव जी ने अपनी तीसरी आँख खोल दी, और उसकी अग्नि से कामदेव भस्म हो गए।
यह देखकर कामदेव की पत्नी रति बहुत दुखी हुईं और उन्होंने भगवान शिव से प्रार्थना की। उनकी भक्ति और प्रेम को देखकर शिव जी ने कामदेव को फिर से जीवन दिया, लेकिन इस बार वे अदृश्य रूप में रहे।
🎨 इस कहानी का संबंध होली से
कामदेव के भस्म होने की घटना होलिका दहन की तरह अग्नि से जुड़ी है
यह दर्शाती है कि अहंकार और वासना का अंत होता है
साथ ही, प्रेम कभी खत्म नहीं होता — वह किसी न किसी रूप में जीवित रहता है
✨ संदेश:
सच्चा प्रेम अमर होता है, लेकिन अहंकार का अंत निश्चित है।
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