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✿•┅━꧁🌹सुप्रभात 🌹꧂━┅•✿
✿ मंगळवार दि. ०३ फेब्रुवारी २०२६✿
✿ माघ शु. द्वितीया २०८२✿
✿शिवशक ३५२✿
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ஜ۩۞۩ संस्कृत सुभाषितमाला ۩۞۩ஜ
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आर्यकर्मणि रज्यन्ते भूतिकर्माणि कुर्वते।
हितं च नाभ्यसूयन्ति पण्डिता भरतर्षभ ॥
भावार्थ : ज्ञानीजन श्रेष्ट कार्य करते हैं । कल्याणकारी व राज्य की उन्नति के कार्य करते हैं । ऐसे लोग अपने हितौषी मैं दोष नही निकालते ।
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