#☝आज का ज्ञान
संतोषी सदा सुखी
हर व्यक्ति अपने Own Vision की सीमाओं (Limit) को ही दुनिया की सीमाएं मान लेता है। जहां संतोष होता है, वहां मन स्थिर और हल्का रहता है। जब आत्मा के भीतर संतोष का अनुभव होता है, तो खुशी किसी कारण का मोहताज नहीं रहती। वह स्वाभाविक रूप से जीवन में प्रकट हो जाती है। ज़िंदगी हमारे रोने से शुरू होती है और दूसरों के रोने पर खत्म होती है। तो जितना हो सके इस कमी को हंसी से भरें।
हमारी कल्पना से भी बड़ी हो सकती है अंदरूनी ताकत। Inner strength. अकेले चलना सबसे मुश्किल है, लेकिन यही वो चलना है जो हमें सबसे मज़बूत बनाता है। हमें सोचना है कि, कुछ भी हासिल करने के लिए जरूरी नहीं है हमेशा दौड़ा ही जाय। बहुत सारी चीजें, ठहरने से भी प्राप्त हो जातीं हैं। जैसे सुख, शांति,और सुकून। संतुलन का झुकाव के लिए मध्य में बने रहने के लिए कभी दाएँ झुकना पड़ता है, कभी बाएँ।
जय जय श्री राधे
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