ARVIND JAKHAR
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श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥ #🌞 Good Morning🌞 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #✍मेरे पसंदीदा लेखक