🎭 आज की राजनीति की यही कड़वी सच्चाई है…
जो कभी
🎬 फिल्मों के दृश्य बनकर
सालों पहले
जनता की आँखों के सामने रख दी गई थी।
तब कहा गया — मनोरंजन है।
आज वही दृश्य
📍 हकीकत बनकर खड़े हैं।
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🪑 आज के नेता
कुर्सी पर तो बैठे हैं,
लेकिन जिम्मेदारी कहीं और खो गई है।
ज्ञान की जगह
📣 शोर है।
ईमानदारी की जगह
💰 सौदे हैं।
और सेवा की जगह
⚖️ ताक़त का प्रदर्शन।
राजनीति अब विचार नहीं रही —
वो एक धंधा बन चुकी है।
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🐑 और जनता?
वो सवाल नहीं करती।
वो तुलना नहीं करती।
वो याद नहीं रखती।
बस
📢 नारे दोहराती है।
🧎 अंधी भक्ति में झुकी रहती है।
नेता बदलते हैं,
चेहरे बदलते हैं,
पर सिस्टम…
वैसा ही रहता है।
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🎥 फिल्मों ने चेतावनी दी थी।
📺 सीरियल्स ने संकेत दिए थे।
📱 रील्स आज आईना दिखा रही हैं।
लेकिन
👁️ देखने की आँख
और
🧠 सोचने का साहस
धीरे-धीरे कम होता गया।
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🕳️ यही कारण है कि
अन्याय खबर बनकर गुजर जाता है।
घटनाएँ ट्रेंड बनकर मिट जाती हैं।
और जनता…
फिर से अगले तमाशे का इंतज़ार करती है।
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🕯️ सबसे डरावनी बात ये नहीं है
कि सिस्टम ऐसा है…
सबसे डरावनी बात ये है
कि अब
बहुत से लोगों को
ये सब सामान्य लगने लगा है।
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