"पहलू"
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आप ख्वाबों में हो रौशन
और रश्म में रहें...
हमे ख्वाहिस है हरदम,
हमदम हो जाने की!
कोरे कागज पे लिखकर,
दिल के नगमे...
अकेले में बैठ कर,
खुद से बरस जाने की!
किधर से भी झलक जाए,
यूँ मोरनी मुड़कर...
कमबख्त आदत ही,
बड़ी है बहक जाने की!
यूँ है दिल-ए-दास्तान,
आसमानों के दरम्यान...
खुद महसूस करके,
खुद को ही समझाने की!
चहकते परिंदों के पर,
जमीन पर नही होते...
हर कोई ही खुशगवार,
होता है बताने की!
पानी दिलों के भला जैसे,
गुनगुनाए गजल...
धड़कन को खुमार,
तरंगों पे लरज जाने की!
बूँद-बूँद स्याही के लिखें,
इश्क-ए-मुहब्बत...
और गौर फ़रमाकर,
खुद से सिमट जाने की!
पलट कर कई बार देखे,
फिर बार-बार देखे...
खनककर लत है,
आईने को भी शर्माने की!
चित चकोर हो जाए जब भी,
चाँद को देखकर...
संवरकर गुलाब को भी,
आदत है मुस्कुराने की!
थिरकते पहलू में जब भी बैठें,
तो संभल कर बैठें...
इस दिल-ए-बेताब को,
आदत है मचल जाने की!💕💞
....✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳
#💔पुराना प्यार 💔 #❤️ आई लव यू #💝 शायराना इश्क़ #🌹प्यार के नगमे💖 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️