##ब्रेकिंग न्यूज़🙏 #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🎞️आज के वायरल अपडेट्स केंद्र सरकार ने हाल ही में कोर्ट में कहा कि कोविड वैक्सीन लगवाना अनिवार्य नहीं था।
यानी लोगों की मर्जी थी—लगवाएं या ना लगवाएं।
सरकार का कहना है कि किसी के साथ कोई जबरदस्ती नहीं की गई।
लेकिन कोविड के समय हमने क्या देखा? सच बोलिए।
क्या आप बिना कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट के ट्रेन में यात्रा कर सकते थे?
क्या आप बिना वैक्सीन सर्टिफिकेट के हवाई यात्रा कर सकते थे?
क्या आप बिना कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट के बसों में चढ़ सकते थे?
क्या आप बिना कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट के किसी सरकारी अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी या स्टेडियम में जा सकते थे?
अगर आप सरकारी कर्मचारी थे, तो क्या बिना कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट के नौकरी पर जा सकते थे?
अगर आप प्राइवेट कंपनी में काम करते थे, तो क्या बिना वैक्सीन सर्टिफिकेट के काम कर सकते थे?
सब्जी मंडियों में गाड़ी अनलोडिंग करने वालों की बिना कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट के एंट्री नहीं थी।
सरकारी और प्राइवेट कंपनियों को नोटिस भेजे गए कि बिना वैक्सीन सर्टिफिकेट के कोई व्यक्ति ड्यूटी पर न आए।
मॉल और दुकानदारों को आदेश दिए गए कि अपने सभी कर्मचारियों को वैक्सीन लगवाएं।
क्या ये जबरदस्ती में नहीं आता?
क्या आदेश में कहीं लिखा गया था कि जिसकी मर्जी हो वो लगवा ले, जिसकी मर्जी न हो वो रहने दे?
कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट पर प्रधानमंत्री की फोटो लगाकर जनता में बांटे गए।
मीडिया ने लाशों के ढेर दिखाए, डर का माहौल बना।
सरकार ने नियम और प्रतिबंध लगाए।
अब अगर कहा जाए कि सब कुछ लोगों की इच्छा पर था, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या परिस्थितियां ऐसी नहीं बना दी गई थीं कि लोगों के पास विकल्प ही न बचे?
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