The Yoga Institute
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2 months ago
आजकल मैं काफ़ी लोगों को देखती हूँ हँसते हुए, बात करते हुए, सब ठीक दिखते हुए… पर आँखों के पीछे एक ख़ामोशी होती है। जैसे सब कुछ चल रहा हो, पर अंदर कुछ रुक-रुक सा गया हो। लोग थके हुए होते हैं, पर कह नहीं पाते… क्योंकि “बिजी रहना” सामान्य हो गया है और “थक जाना” कमजोरी समझी जाती है। शायद इसलिए आजकल सबसे ज़्यादा ज़रूरत एक-दूसरे को समझने की है, सिर्फ़ देखने की नहीं। #theyogainstitute#health