Arvind Kumar
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13 hours ago
काशी करौंत काहे लेही, बिना भजन नहीं ढंग रे। कोटी ग्रंथ का योही अर्थ है, करो साध सत्संग रे।। मोक्ष प्राप्ति के लिए पूर्ण और सच्चे संत की शरण में जाना अनिवार्य है। इसी का समर्थन श्रीमद्भगवद्गीता भी करती है: तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया। उस परम ज्ञान को जानने के लिए तत्वदर्शी संत के पास जाओ, उन्हें दंडवत प्रणाम करो और निष्कपट भाव से सेवा करो। #SacrificedAll_LostMoksha #God_KabirJi_Nirvan_Diwas