"यादों की श्रृंखला"
"तुझे भूल जाने का नाटक बड़ी बेमालूम सा करता हूँ,
नज़रें महफ़िलों में तुझ पर, किंतु अनदेखा सा करता हूँ।
तुझे भूलने की तरकीबों में अक्सर यूँ ही डूबा रहता हूँ,
हर प्रयास तेरी यादों की श्रृंखला को मन समर्पित करता हूँ।
कम्बख़्त भूलना भूलकर, मोहब्बत खामोशी से करता हूँ।"
"जुबां से लाख कह दूँ कि तेरे बिना कुछ बिगड़ता नहीं मेरा,
आँखों से ओझल है मगर, मन से तू बिछड़ता नहीं यारा।"
अमोल हरिदास.
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