🌿 निंदा और संसारिक भोगों से सावधान 🌿
*पूज्य महाराज जी जीवन का परम सत्य समझाते हुए कहते हैं—*
`संसार के भोगों में वास्तविक सुख नहीं है। ✨`
इंद्रियों को दुलारना और मन को विषयों में उलझाए रखना ही असली दुस्संग है,
जो धीरे-धीरे हमारे जीवन की शांति और शक्ति को नष्ट कर देता है। ⚠️
हम *“बस एक बार और…”* की अंतहीन तृष्णा में फँसे रहते हैं,
पर *इससे कभी तृप्ति नहीं मिलती* —केवल बेचैनी बढ़ती है। 🌊
> यदि सच में भगवत प्राप्ति और अपना कल्याण चाहते हो,
> तो शरीर और इंद्रियों के प्रति अत्यधिक मोह त्यागना होगा। 🙏
*अब समय है—*
_अपनी ऊर्जा को व्यर्थ विषयों से हटाकर प्रभु के चरणों में समर्पित करने का।_ 🌸✨
यहीं से शांति है, यहीं से सच्चा आनंद।
🪷 *।। राधे राधे ।।*🪷
#राधे 🙏 राध