#💭माझे विचार #😇माझे अनमोल विचार✍ #☺️सकारात्मक विचार #☺चांगले विचार
✿•┅━꧁🌹सुप्रभात 🌹꧂━┅•✿
✿ बुधवार दि. २५ फेब्रुवारी २०२६✿
✿ फाल्गुन शु. नवमी १९४७ ✿
✿ विक्रम सवत्सर २०८२✿
✿शिवशक ३५२✿
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*ஜ۩۞۩ संस्कृत सुभाषितमाला ۩۞۩ஜ*
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एकः पापानि कुरुते फलं भुत्तेक्त महाजनः।
भोत्तक्तारो विप्रमुच्यन्ते कर्ता दोषेण लिप्यते।।
व्यक्ति अकेला पाप-कर्म करता है, लेकिन उसके तात्कालिक सुख-लाभ बहुत से लोग उपभोग करते हैं और आनंदित होते हैं। बाद में सुख-भोगी तो पाप-मुक्त हो जाते हैं, लेकिन कर्ता पाप-कर्मों की सजा पाता है।
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