Manjit Kaur Sandhya
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2 months ago
पुराने ज़माने की बात है। एक राज्य था, जहाँ रोटी की कीमत सिर्फ़ 2 पैसे थी। जनता संतुष्ट थी, जीवन सरल था। समय बदला, खर्चे बढ़े, और रोटी की कीमत बढ़ाने की बात उठी। असल में रोटी 4 पैसे की होनी थी, लेकिन सेठ और राजा की आपसी समझ से दाम सीधे 6 पैसे कर दिए गए। जनता में हड़कंप मच गया। “इतनी महँगी रोटी कैसे खरीदी जाए?” — लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। तब राजा ने चाल चली। उसने जनता और रोटी बेचने वालों—दोनों को दरबार में बुलाया। दरबार में बड़ी गंभीरता से घोषणा हुई— “अब से रोटी 4 पैसे में मिलेगी।” जनता खुश—“देखो राजा कितना न्यायप्रिय है!” बेचने वाले खुश—“चलो, जो चाहिए था वही मिला।” और राजा मुस्कुराया… क्योंकि खेल पूरा हो चुका था। आज जब चाँदी के दाम पहले तेज़ी से बढ़ते हैं और फिर अचानक “कम” हो जाते हैं, तो मन पूछता है— कहीं वही पुरानी कहानी, नए ज़माने में दोहराई तो नहीं जा रही? #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #🫨सोना-चांदी में महा-गिरावट🪙🥈 #🤔आज से बदल जाएंगे ये बड़े नियम❗📰 #😇 चाणक्य नीति #👨‍💻बिजनेस आइडिया💡