#सतभक्ति संदेश
उत्तम धर्म जो कोई लखि पाये। आप गहें औरन बताय ।। तातें सत्यपुरूष हिये हर्षे। कृपा वाकि तापर बर्षे ।। जो कोई भूले राह बतावै। परम पुरुष की भक्ति में लावै ।। ऐसो पुण्य तास को बरणा। एक मनुष्य प्रभु शरणा करना ।। कोटि गाय जिनि गहे कसाई। तातें सूरा लेत छुड़ाई ।।
एक जीव लगे जो परमेश्वर राह। लाने वाला गहे पुण्य अथाह ।।
भावार्थ- परमेश्वर कबीर जी ने कहा है कि एक मानव (स्त्री-पुरूष) उत्तम धर्म यानि शास्त्र अनुकूल धर्म-कर्म में पूर्ण संत की शरण आता है, औरों को भी राह (मार्ग) बताता है। उसको परमेश्वर हृदय से प्रसन्न होकर प्यार करता है। जो कोई एक जीव को परमात्मा की शरण में लगाता है तो उसको बहुत पुण्य होता है। एक गाय को कसाई से छुड़वाने का पुण्य एक यज्ञ के तुल्य होता है। करोड़ गायों को छुड़वाने जितना पुण्य होता है, उतना पुण्य एक जीव को काल से हटाकर पूर्ण परमात्मा की शरण में लगाने का मध्यस्थ को होता है।