Parmod Jain
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5 months ago
मदर टेरेसा ने 18 साल की उम्र में भारत आने के बाद गरीबों और बीमारों की सेवा के लिए मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की। उनके काम को वैश्विक स्तर पर प्रसिद्धि मिली, जिससे उन्हें 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला और उन्होंने मानवीय सेवा के प्रति अपनी आजीवन प्रतिबद्धता से कई लोगों को प्रेरित किया। मदर टेरेसा के जीवन और कार्य की मुख्य विशेषताएं प्रारंभिक जीवन और व्यवसाय: 1910 में जन्मी, वह 18 वर्ष की उम्र में भारत में मिशनरी बनने के लिए सिस्टर्स ऑफ लोरेटो में शामिल हो गईं। कोलकाता में अध्यापन के बाद, 1946 में उन्हें सबसे गरीब लोगों की सेवा करने का एक "आह्वान" मिला, जिसके कारण उन्होंने अपनी शिक्षण भूमिका छोड़ दी और उनके बीच रहने लगीं। मिस्सीओनरिएस ऑफ चरिटी: 1950 में उन्होंने मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की, जो बीमार, परित्यक्त और मरते हुए लोगों की देखभाल के लिए समर्पित एक धार्मिक संगठन था। यह संगठन विभिन्न हाशिए पर पड़े समूहों की देखभाल करता है, जिनमें कुष्ठ रोगी, बेघर लोग और एचआईवी/एड्स से पीड़ित लोग शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान: गरीबी और बीमारी से लड़ने के उनके प्रयासों ने व्यापक अंतर्राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया। 1979 में उन्हें उनके मानवीय कार्यों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। आजीवन समर्पण: मदर टेरेसा ने जीवन भर गरीबों के लिए अथक कार्य किया तथा अपनी अटूट आस्था और सेवा के प्रति समर्पण से लाखों लोगों को प्रेरित किया। वैश्विक प्रभाव: 21वीं सदी तक, मिशनरीज ऑफ चैरिटी ने 130 से अधिक देशों में अपनी संस्थाएं स्थापित कर ली थीं, तथा सेवा की उनकी विरासत को जारी रखा। #मदर टेरेसा #मदर टेरेसा जयंती