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जय लक्ष्मी माँ — देवी जिनके चार हाथ मानवजीवन के चतुर्विध लक्ष्य: धर्म, काम, अर्थ और मोक्ष का प्रतीक हैं; उनकी उपासना समृद्धि ही नहीं, सामाजिक-मानसिक संतुलन भी देती है, और यह कि उन्हें ऋग्वेद के श्रीसूक्त में भी महिमा मिली है ये बताता है कि उनकी पूजा प्राचीनतम सांस्कृतिक धाराओं से जुड़ी है; अष्टलक्ष्मी का विचार बताता है कि ‘समृद्धि’ सिर्फ धन नहीं, बल्कि ज्ञान, वीरता, संतान व विजय जैसे आयामों में भी विभाजित है — एक तर्कसंगत नज़रिया कि संतुलित लक्ष्मी-पूजा समाजिक संसाधनों और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने का प्रतीक हो सकती है; “Her four hands represent the four goals of human life — dharma, kama, artha and moksha” — यह विचार हमें याद दिलाता है कि भक्ति केवल भौतिक लाभ की चाह नहीं बल्कि जीवन के समग्र लक्ष्य का स्मरण कराती है; एक छोटा-सा हुक: अगर आप अगले दीपावली पर केवल दिये जलाने की बजाय घर की नीयत, साफ-सफाई और सहयोग बढ़ाएँगे तो लक्ष्मी के सापेक्ष अर्थ और भी गहरा होंगे — आओ आज छोटे कर्मों से शुभता बुलाएँ! 🙏✨🌸🪔 #जयलक्ष्मी #Lakshmi #AshtaLakshmi #लक्ष्मीपूजा #ProsperityNow. @जय माँ लक्ष्मी🙏 #जय लक्ष्मी माँ #जय माँ लक्ष्मी #जय माँ लक्ष्मी #जय माँ लक्ष्मी🌹🙏🙏🌹 #radhe krishna ji