प्रणाम — हाथ जोड़कर दिल से किया गया वह पुराना अभिवादन जिसे संस्कृत में 'नमस् + ते' से बनाया गया है और Añjali Mudrā (हाथ जोड़ना) के रूप में नाट्यशास्त्र व वैदिक ग्रंथों में दर्ज है, इतिहास में यह देव-पूजा से लेकर सामाजिक सम्मान तक का संकेत रहा है; एक छोटा तर्क/विज्ञान: प्रार्थनात्मक मुद्राएँ और योग अभ्यास मानसिक शांति बढ़ाने और तनाव घटाने से जुड़े पाए गए हैं (यानी parasympathetic गतिविधि बढ़ सकती है), लेकिन सीधे-सीधे “हाथ जोड़ने से वागस नर्व सक्रिय होता है” पर सीमित प्रत्यक्ष प्रमाण हैं — इसलिए व्यवहारिक रूप में प्रणाम को एक सरल, contact-free, न्यूरो-सामाजिक सिग्नल समझें जो सम्मान, सहिष्णुता और आत्म-केंद्रित शांति दोनों को बढ़ाता है; धर्म में इसका सही उपयोग सम्मान और विनम्रता दिखाना है और अंधविश्वास या अपमान के लिए इसका उपयोग गलत है। ✨🙏 “I bow to the divine in you” — बोलिए, महसूस कीजिए और देखिए कैसे एक छोटा-सा प्रणाम रिश्तों और मन को बदल देता है।
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