priya Dasi
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5 months ago
#सतभक्ति संदेश कबीर, गृह कारण में पाप बहु, नित लागै सुन लोय। ताहिते दान अवश्य है, दूर ताहिते होय ।। कबीर, चक्की चौकै चूल्ह में, झाडू अरू जलपान। गृह आश्रमी को नित्य यह, पाप पाँचौ विधि जान।। संत रामपाल जी भावार्थ- गृहस्थी को चक्की से आटा पीसने में, खाना बनाने में चूल्हे में अग्नि जलाई जाती है। चौंका अर्थात् स्थान लीपने में तथा झाडू लगाने तथा खाने तथा पीने में पाँच प्रकार से पाप लगते हैं। हे संसारी लोगो! सुनो! इन कारणों से आपको नित पाप लगते हैं। इसलिए दान करना आवश्यक है। ये पाप दान