"OYO का वो कमरा… जहां मेरा प्यार मरा और आत्मसम्मान जन्मा, "जिसे मैं इश्क़ समझी, वो सिर्फ़ एक रात की तसल्ली थी…"
स्मिता एक छोटे शहर की सीधी-सादी लड़की थी। कॉलेज में पहली बार किसी ने उसके दिल के तार छेड़े थे — आरव।
आरव में कुछ बात थी — उसकी बातों में नर्मी, आंखों में ईमानदारी और मुस्कान में भरोसा।
स्मिता को वो अच्छा लगने लगा। आरव हर दिन उसके साथ लाइब्रेरी में बैठता, उसका बैग उठाता, और हर बार कहता —
“तुम जैसी लड़की के लिए मैं सब कुछ छोड़ सकता हूँ।”
स्मिता का दिल हर दिन आरव की बातों में थोड़ा और पिघलता गया।
भाग 2: वो पहली 'हां'
तीन महीने बीते।
आरव ने एक दिन कहा —
"चलो कहीं बाहर चलते हैं… बस तुम और मैं। एक होटल में आराम से बैठेंगे, बातें करेंगे।"
स्मिता झिझकी।
“होटल…?”
आरव मुस्कराया —
“बस बात करेंगे। कुछ नहीं करूँगा… तुमसे प्यार करता हूँ। वादा।”
वो मान गई।
भाग 3: OYO रूम
कमरा सादा था। दीवारें सफेद, एक बैड, एक टेबल।
लेकिन कमरे का माहौल स्मिता के दिल की धड़कनों से तेज़ था।
आरव ने उसके हाथ थामे।
स्मिता घबरा गई —
“आरव… हमें ऐसा नहीं करना चाहिए…”
आरव चुप रहा।
धीरे-धीरे उसने उसे अपने पास खींचा और कहा —
“तुम मुझ पर भरोसा नहीं करती?”
उसकी आंखें झुकीं। उसने “हां” में सिर हिला दिया।
भाग 4: अगली सुबह
अगली सुबह जब स्मिता उठी, आरव बिस्तर पर नहीं था।
टेबल पर एक पर्ची थी:
“सॉरी स्मिता, ये प्यार नहीं था — एक तसल्ली थी। तुम अच्छी हो, पर मैं अब आगे नहीं बढ़ सकता। खुश रहो।”
स्मिता की आंखों के सामने अंधेरा छा गया।
उसने मोबाइल उठाया — आरव के सारे मैसेज डिलीट। कॉल — ब्लॉक।
उसके बाद वो कमरे में देर तक रोती रही…
भाग 5: अकेलेपन की आग
वो कॉलेज जाती, मगर अब किसी से नज़र नहीं मिलती थी।
लोगों की आंखों में सवाल थे… और उसकी आत्मा में पछतावा।
उसे लगा उसने सब कुछ खो दिया।
लेकिन कुछ टूटा नहीं था… कुछ अब बनना शुरू हुआ था।
भाग 6: बदलाव की शुरुआत
स्मिता ने खुद से सवाल पूछे —
क्या प्यार सिर्फ जिस्म की भूख है?
क्या मैं सिर्फ एक लम्हे की तसल्ली थी?
या मुझे उस कमरे में अपनी कीमत का अहसास हुआ?
उसने जवाब खुद में ढूंढा —
“मैं कोई इस्तेमाल की चीज़ नहीं… मैं इंसान हूँ — और अब मुझे खुद को वापस पाना है।”
भाग 7: आज की स्मिता
चार साल बीते।
स्मिता अब एक महिला सहायता केंद्र में काउंसलर है — वह लड़कियों को बताती है कि:
❝प्यार कभी किसी बंद कमरे में साबित नहीं होता, बल्कि उस भरोसे में होता है जो बाहर सबके सामने निभाया जाए।❞
अब वो मुस्कुराती है — लेकिन वो मुस्कान सिखा चुकी है कि
धोखा ज़िंदगी का अंत नहीं, एक सबक होता है।
🌸 अंतिम संदेश:
"OYO का वो कमरा एक हादसा नहीं था — वो मेरी आत्मा की नींव थी। मैंने वहां खुद को खोया जरूर था, लेकिन फिर उसी जगह खुद को पा भी लिया।"
💔 अगर इस कहानी ने आपके मन को छुआ हो, तो इसे ❤️ लाइक करें और शेयर करें— ताकि कोई और स्मिता, अपनी आवाज़ खोने से पहले जाग जाए।
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