#सत_भक्ति_संदेश
कबीर, आग पराई आपनी, हाथ दियें जल जाये।
नारी पराई आपनी, परसें बिन्द नसाया।।
जैसे अग्नि अपने घर की हो, चाहे दूसरे घर की, हाथ देने से हाथ जलेगा। इसी प्रकार स्त्री अपनी हो या अन्य की, मिलन करने से एक जैसी ही हानि होती है।
##सत_भक्ति_संदेश