🕉️नंद भवन का आंगन आज अलौकिक आनंद से भर उठा था। चारों ओर दीपों की कोमल रोशनी, फूलों की सुगंध और मधुर हंसी की ध्वनि वातावरण को और भी पवित्र बना रही थी। अनेक गोपियाँ सजी-धजी, मन में अपार प्रेम और उत्सुकता लिए, एकत्र होकर बैठी थीं। सबकी निगाहें एक ही ओर टिकी थीं—अपने नन्हे कान्हा पर।
बीच आंगन में बाल कृष्ण, पीताम्बर धारण किए, सिर पर मोरपंख सजाए, मधुर मुस्कान के साथ नृत्य कर रहे थे। उनके छोटे-छोटे चरणों की थिरकन, हाथों की मनमोहक मुद्राएँ और चेहरे की चंचलता देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं आनंद ही रूप लेकर नृत्य कर रहा हो।
गोपियाँ ताली बजाते हुए, प्रेम भरी दृष्टि से कृष्ण को निहार रही थीं। किसी के चेहरे पर ममता थी, तो किसी के हृदय में भक्ति का सागर उमड़ रहा था। हर एक के मन में यही भाव था कि यह नन्हा बालक कोई साधारण नहीं, बल्कि साक्षात दिव्यता का स्वरूप है।
नृत्य करते-करते जब कृष्ण ने एक चंचल मुस्कान के साथ सबकी ओर देखा, तो पूरा नंद भवन जैसे प्रेम और आनंद में डूब गया। उस क्षण में समय ठहर सा गया—बस रह गया तो केवल भक्ति, प्रेम और कान्हा की अद्भुत लीला का मधुर अनुभव।
🌿𝗧𝗿𝗶𝗸𝗮𝗹𝗱𝗮𝗿𝘀𝗵𝗶🌿
#मेरी राधा रानी ##राधा रानी