श्यामा
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5 days ago
वो लैला थी… वो मजनूँ था, इश्क़ उनका किस्सा नहीं—इबादत था। दुनिया जीत गई दोनों को जुदा करके, पर मोहब्बत… आज भी ज़िंदा है हर दास्तान में। वो मिल न सके—ये उनकी हार नहीं थी, क्योंकि कुछ इश्क़ मुकम्मल होकर भी अधूरे लगते हैं… और कुछ अधूरे होकर भी अमर हो जाते हैं। #❣️Love you ज़िंदगी ❣️ #💓 मोहब्बत दिल से #💝 शायराना इश्क़ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🌙 गुड नाईट