*वसंत बहार*
*माध्यम* – फ़िरोज़ाबाद की कांच की नक्काशी | *आकार* – 63.6 x 3 मीटर
वसंत पंचमी का पर्व उत्तर प्रदेश की विविध संस्कृतियों का संगम है। चाहे वह पावन नगरी वृंदावन का वसंत हो या फिर लखनऊ की 'फूलों वाली गली' की बहार, जहाँ रंग और सुगंध मिलकर वसंत बहार के उत्सव को रचते हैं।
प्राकृतिक उपवनों और बगीचों जैसा सौंदर्य, पारदर्शी और रंगीन फूलों की अनूठी सजावट इस उत्सव की शोभा बढ़ाती है। यह सजावट और उसकी कलात्मक प्रस्तुति हर किसी का मन मोह लेती है।
फ़िरोज़ाबाद की कांचकारी का कौशल एवं कला वसंत पंचमी के उत्सव को हमारे समक्ष जीवंत कर देती है।
इस टर्मिनल की यह खूबसूरत वीथिका लखनऊ से विश्व के अनेक स्थानों के लिए उड़ान भर रहे यात्रियों के मस्तिष्क पर एक ऐसा चित्र अंकित करती है जो वर्षों तक उनके साथ रहेगा। अपनी सांस्कृतिक सार्थकता के साथ 'वसंत बहार' आधुनिक कला को प्राचीन शिल्प के साथ जोड़ता है, और यात्रियों को सुखद तथा सकारात्मक ऊर्जा के साथ विदा करता है।
फ़िरोज़ाबाद कांच की चूड़ियों, हस्तशिल्प और वैभवशाली फ़ानूस के लिए जाना जाता है। चूड़ियाँ सुहाग का प्रतीक होती हैं, इस कारण फ़िरोज़ाबाद को 'सुहाग नगरी' के नाम से भी जाना जाता है। ताज नगरी आगरा से लगभग चालीस किलोमीटर की दूरी पर स्थित फ़िरोज़ाबाद का अपना गौरवशाली इतिहास है। सोलहवीं शताब्दी से फ़िरोज़ाबाद के कांच कारीगर परंपरागत ढंग से कांच की कलाकृतियाँ बनाते आए हैं।
ये कारीगर कांच को पिघलाकर उसे गुब्बारों की तरह फुलाकर नई और आकर्षक कलाकृतियों में ढालते हैं। 'वसंत बहार' के लिए फ़िरोज़ाबाद के कारीगरों ने अपने कौशल का परिचय देते हुए कांच के स्वरूप को परिवर्तित कर उसे अद्भुत रूप और रंग दिए हैं। इन कांच से बने फूलों को लताओं के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिन्हें बनाते समय फूलों केV स्वाभाविक रंग और रूप का विशेष ध्यान रखा गया है।
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