#🌊गंगा सप्तमी 🌸
भेदशून्याऽभेदकारीभेदकप्राणहारिणी ।
अभेदबुद्धिरूपासि अभेदबुद्धिमत्प्रिये ॥
सत्यप्रपञ्चरहिते अनिन्ह्यदोषवर्ज्जिते ।
कमले विमले शुद्धे तत्त्वब्रहापरात्मिके ॥
[ बृहद्धर्मपुराण , पूर्वखण्ड , ५।३७-३८ ]
~ आप भेदरहिता , भेद करने वाली तथा भेदकगण के प्राणों का हरण करने वाली हैं । आप अभेदबुद्धिरूप लोगों को कृपा से देखने वाली , अभेदबुद्धि स्वरूपा हैं । हे सत्ये ! हे संसारवजिते, अनिन्द्ये , निदेषि , कमले , विमले , शुद्धे आप परब्रह्मरूपा हैं ।
आप समस्त को गङ्गा सप्तमी की कोटिशः मङ्गल कामनाएं🙏🏻💐
नारायण
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