"कृष्ण मनोहारीणी" राधिका~
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21 days ago
ना जाने क्यूं आजकल ये मन मेरा भारी सा रहता हैं, तन्हा दिल से हसरतों का बोझ उतारा नहीं जाता...! आ ना.. मेरी हसरतों के लिए.. आ... कि अब तन्हाई का खंजर दिल के पार उतारा नहीं जाता। #😛 व्यंग्य 😛 #😵टाइम पास #😜Attitude शायर #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #👫 हमारी ज़िन्दगी