Himkar prasad singh
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9 hours ago
प्रेम वही, जो आंखों से बयां हो.. होठों से बयां होने पर प्रेम, प्रेम नहीं रह जाती। प्रेम की मूक अभिव्यक्ति ही ज्यादा प्रभावी होई है, जो किसी भी संवेदनशील हृदय में प्रर्म के बुझे हुए दीपक को भी प्रज्वलित कर देती है। आपकी क्या राय है??गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:। नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।। धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:। गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।बैसाख माह की शुभकामनाएं!, सुंदरबुधवार #जय श्री गणेश