-
617 views
22 hours ago
🍁।।राम जी राम।।🍁 🍁 *विचार संजीवनी* 🍁 *..यह रोना एकदम सार्थक है..* भगवान् के ध्यानमें घबराहट नहीं होती, ध्यानमें तो आनन्द आता है, प्रसन्नता होती है; पर जबरदस्ती मन लगानेसे थोड़ी घबराहट होती है तो कोई हर्ज नहीं। भगवान् से कहो- 'हे नाथ! मन नहीं लगता।' कहते ही रहो, कहते ही रहो। एक सज्जनने कहा था-कहते ही रहो 'व्यापारीको ग्राहकके अगाड़ी और भक्तको भगवान् के अगाड़ी रोते ही रहना चाहिये कि क्या करें बिक्री नहीं होती, क्या करें पैदा नहीं होती।' ऐसे भक्तको भगवान्‌के अगाड़ी 'क्या करें, महाराज ! भजन नहीं होता है, हे नाथ! मन नहीं लगता है।' ऐसे रोते ही रहना चाहिये। ग्राहकके अगाड़ी रोनेसे बिक्री होगी या नहीं होगी, इसका पता नहीं, पर भगवान् के अगाड़ी रोनेसे काम जरूर होगा। यह रोना एकदम सार्थक है। सच्ची लगन आपको बतायेगी कि हमारे भगवान् हैं और हम भगवान्‌के हैं। यह सच्चा सम्बन्ध जोड़ लें। उसीकी प्राप्ति करना हमारा खास ध्येय है, खास लक्ष्य है। यह एक बन जायगा तो दूजी बातें आ जायँगी। बिना सीखे ही याद आ जायँगी, भगवान्‌की कृपासे याद आ जायँगी। *राम ! राम !! राम !!!* परम् श्रद्धेय स्वामी जी श्रीरामसुखदास जी महाराज, पुस्तक- *भगवन्नाम* पृष्ठ ३४ #🌙Good Night🌃 #🌙 शुभरात्रि 🌙 #🙏 प्रणाम 🙏 #🔱हर हर महादेव🔱 #😊प्रेरणा संग शुभकामना💐