#संस्कृत सुभाषितमाला #✍मराठी साहित्य #📝कविता / शायरी/ चारोळी
✿•┅━꧁🌹सुप्रभात 🌹꧂━┅•✿
✿ बुधवार दि. २२ एप्रिल २०२६✿
✿वैशाख शु. षष्ष्ठी शके १९४८✿
✿ विक्रम सवत्सर २०८२ ✿
✿ शिवशक ३५२ ✿
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ஜ۩۞۩ संस्कृत सुभाषितमाला ۩۞۩ஜ
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यो नोद्धतं कुरुते जातु वेषं न पौरुषेणापि विकत्थतेऽन्त्यान्।
न मूर्च्छितः कटुकान्याह किञ्चित् प्रियंसदा तं कुरुते जनो हि ॥
भावार्थ : जो व्यक्ति शैतानों जैसा वेश नहीं बनाता ,वीर होने पर भी अपनी वीरता की बड़ाई नही करता ,क्रोध् से विचलित होने पर भी कड़वा नहीं बोलता ,उससे सभी प्रेम करते हैं ।
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