*ब्रह्मचर्य की शक्ति*
*ब्रह्मचारी भीष्म पितामह युद्ध में बुरी तरह घायल हुए, उनका सारा शरीर तीर से बिदा हुआ था। उस समय सूर्य दक्षिणायन थे। वे उत्तरायण सूर्य में देह त्यागना चाहते थे इसलिए अभीष्ट समय आने की प्रतीक्षा में उन्होंने अपने प्राणों को रोक लिया । शरीर की दृष्टि से वे उतने घायल थे कि तुरन्त ही प्राण निकल जाना चाहिए था पर वे अपनी इच्छा शक्ति के बल पर तब तक शरीर धारण किये रहे जब तक कि उत्तरायण सूर्य का शुभ मुहूर्त न आ गया।*
*ब्रह्मचर्य की शक्ति महान् है उसके बल पर प्राण भी वश में रह सकते हैं।*
*-रामकृपा-* #किस्से-कहानी