१७ मई
किसी के द्वारा प्रशंसित होने मात्र से
तुम बड़े नहीं हो, और
किसी के द्वारा निन्दित होने मात्र से
तुम छोटे नहीं हो !
यह सोचो, तुम्हारे कार्य
महानता वाले हैं, या अधमता वाले ?
युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी
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