#✍🏽 माझ्या लेखणीतून #🙂सत्य वचन #📝 शिकवण
✿•┅━꧁🌹सुप्रभात 🌹꧂━┅•✿
✿ सोमवार दि. २० एप्रिल २०२६✿
✿वैशाख शु. तृतीया शके १९४८✿
✿ विक्रम सवत्सर २०८२ ✿
✿ शिवशक ३५२ ✿
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ஜ۩۞۩ संस्कृत सुभाषितमाला ۩۞۩ஜ
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न संरम्भेणारभते त्रिवर्गमाकारितः शंसति तत्त्वमेव ।
न मित्रार्थरोचयते विवादं नापुजितः कुप्यति चाप्यमूढः ॥
भावार्थ : जो जल्दबाजी में धर्म ,अर्थ तथा काम का प्रारंभ नहीं करता ,पूछने पर सत्य ही उद् घाटित करता है, मित्र के कहने पर विवाद से बचता है ,अनादर होने पर भी दुःखी नहीं होता। वही सच्चा ज्ञानवान व्यक्ति है ।
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