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‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼
🚩 *"सनातन परिवार"* 🚩
*की प्रस्तुति*
🔴 *आज का प्रात: संदेश* 🔴
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*हमारे शास्त्रों में बताया गया है कि झूठ बोलना पाप है | धर्म के विपरीत किए गए कर्म को अधर्म कहा गया है | मनुष्य को अधर्म एवं झूठ बोलने से बचना चाहिए , परंतु पुराणों में कई जगह ऐसे उदाहरण मिलते हैं जहां हमारे महापुरुष यहां तक की देवता भी झूठ बोलते व अधर्म करते हुए दिखाई पड़ते हैं | जब देवताओं की द्वारा किए गए ऐसे कृत्यों को हम पुराणों में पढ़ते हैं तो मन में एक जिज्ञासा जागृत हो जाती है, कि जिन्हें हम देवता मानते हैं और जो हमारे आदर्श हैं उनके द्वारा भी अधर्म क्यों किया गया जब हमारे देवता अधर्म कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं ??? ऐसी जिज्ञासाएं मनुष्य को आकुल एवं व्याकुल कर देती है | ऐसी जिज्ञासाओं के भार से दबा हुआ मनुष्य यह नहीं समझ पाता है कि धर्म क्या है और अधर्म क्या ?? जिन पुराणों में देवताओं के द्वारा अधर्म का वर्णन मिला है उन्हीं पुराणों में उनके अधर्म करने का कारण भी स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है | यह निर्विवाद रूप से स्पष्ट है कि मानव हृदय सदैव से नकारात्मक तथ्यों की ओर ज्यादा मुड़ता है इसका परिणाम यह होता है कि मनुष्य सकारात्मक तथ्यों को जानने का प्रयास ही नहीं करता है | और फिर उसके मन में एक बात घर करने लगती है कि जब हमारे आदर्शों के द्वारा ऐसा किया जा सकता है तो हम क्यों नहीं कर सकते | जबकि ऐसे किसी भी प्रसंग को समझने के लिए मनुष्य को या तो स्वयं या फिर सद्गुरु के माध्यम से इन विषयों की गहराई में उतरना होगा |*
*आज अनेक लोग उहापोह की स्थिति में बने रहते हैं कि क्या सही मानें और क्या गलत ? यद्यपि यह सत्य है कि झूठ बोलना पाप है तथापि हमारे नीतिकार बताते हैं कि यदि एक झूठ बोलने से किसी का भला होता है तो वह झूठ सौ सत्य के बराबर होता है | हमारे झूठ बोलने से यदि किसी के प्राण बच सकते हैं तो वह झूठ नहीं कहा जाता है | ठीक उसी प्रकार यदि किसी भी परिस्थिति में धर्म को बचाने के लिए अधर्म भी करना पड़ा है तो उसे अधर्म की श्रेणी में नहीं रखा गया है | परंतु यह भी सत्य है कि अधर्म किसी ने भी कैसी भी परिस्थिति में किया हो उसे उसका दंड भी अवश्य भुगतना पड़ा है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" स्पष्ट करना देना चाहता हूँ कि आज के परिवेश में फरियादी जब अपनी फरियाद लेकर अधिकारियों के पास पहुँचता है तो अधिकारियों के द्वारा उसकी फरियाद को तो अंकित कर लिया जाता है | फिर प्रारम्भ होती है विवेचना | अधिकारियों द्वारा किसी पर दोषारोपण करने से पहले सम्बन्धित प्रार्थनापत्र की सत्यता को जानने के लिए उक्त विषय की गहनता से विवेचना की जाती है | तब उन्हें झूठ या सत्य का पता चल पाता है | उसी प्रकार पुराणों में उद्धृत ऐसे किसी भी विषय को पढकर सर्वप्रथम हमें उसकी सत्यता जानने का प्रयास करना चाहिए | जब हम उस पौराणिक घटना की सत्यता को जान लेते हैं तो हमारे मन में जो नकारात्मकता का घेरा बनना प्रारम्भ हो चुका होता है वह नष्ट हो जाता है | और फिर हमें ऐसी घटित घटनाओं से या अपने महापुरुषों से कोई शिकायत नहीं रह जाती है | आज कुछ विरोधी हमारे सनातन ग्रंथों को बिगाड़ने का का कार्य कर रहे हैं | इनसे वार्ता करने के लिए आवश्यकता है कि हम अपने ग्रंथों की सत्यता को विधिवत जानें |*
*आज की पीढी जो धर्मग्रंथों के पठन - पाठन से विमुख हो रही है उन्हें अपने ग्रंथों का अध्ययन करना चाहिए ! अन्यथा वे किसी के भी किये प्रश्न का उत्तर नहीं दे पायेंगे जिसका परिणाम यह होगा कि यही पीढियां ज्ञान के अभाव में नकारात्मक होती जायेंगी |*
🌺💥🌺 *जय श्री हरि* 🌺💥🌺
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सभी भगवत्प्रेमियों को आज दिवस की *"मंगलमय कामना"*----🙏🏻🙏🏻🌹
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आचार्य अर्जुन तिवारी
प्रवक्ता
श्रीमद्भागवत/श्रीरामकथा
संरक्षक
संकटमोचन हनुमानमंदिर
बड़ागाँव श्रीअयोध्याजी
(उत्तर-प्रदेश)
9935328830
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#❤️जीवन की सीख #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं #🙏🏻आध्यात्मिकता😇