मोर कुटी (बरसाना) से जुड़ी यह लीला बहुत ही अद्भुत और प्रेम से भरी मानी जाती है।
कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने यहाँ राधा रानी का रूप इसलिए धारण किया था ताकि वे उनके प्रेम और भाव को पूरी तरह अनुभव कर सकें।
इस लीला में कृष्ण जी ने नारी श्रृंगार किया और मोर रूप में सजकर राधा जी के साथ रास किया, जिसे “मोर कुटी लीला” कहा जाता है।
इसका मुख्य संदेश यह है कि सच्चा प्रेम अहंकार से परे होता है—जहाँ प्रेमी और प्रिय में कोई भेद नहीं रहता।
इसी कारण यह स्थान भक्ति, प्रेम और समर्पण का बहुत बड़ा प्रतीक माना जाता है।#राधे राधे
#🤗जया किशोरी जी🕉️