"नजाकत"
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दिल पे धड़कन पे अब तेरा
कुछ यूँ भी नाम है,
आज से हर साँसें भी
बस तुम्हरे ही गुलाम हैं।
हकीकत के दुनिया मे
ख्वाबों का क्या काम है,
जब गुलाबों के पंखुरियों से
ये दिन है ये शाम है।
सुनहरे रंग और रूप जब
खिलते हो कली बनकर,
कसम भी कम सा है
फिर तो ये डोलता ईमान है।
सच हर सांसों में नजरबंद
कर लूँ बिना पुछे ही तुझे,
बढ़ते हर धड़कनों के ही
हुए कुछ इस कदर रफ्तार हैं।
तुझसे ही चोरी करके तुझे
बसा ले हर यादों में ऐसे,
जैसे समा में बिखर कर
हर खूसबू हुए यूँ तमाम हैं।
कामनाओं के वो देवता अब
माफ करे दें हमे भी,
कत्ल करती इन नजाकत पे
तो हर शख्स ही बेईमान है।
चंचल सोख़ हो और फिर
हर अदाएँ हसीन जिसकी,
हर मुस्कुराहट पे रोम रोम
इतराकर यूँ करते कमाल हैं।
जानबूझ कर ही आजकल
यूँ बिजली गिराते हैं बादल,
और बेचारा अनजाना जमीन
प्यासा रहकर ही बदनाम है।💕💞
.....✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳
#💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #🌹प्यार के नगमे💖 #💔पुराना प्यार 💔 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️