सुचिता जामगावकर जैन
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13 days ago
राग और शुभाशुभ भव दोनोही संसार भ्रमण के लिये जो राग हम अपनते है वो मुक्ति केलिये अशुभ भाव लगता है मुक्ति पाने के लिये शुभ कर्मो का उदय आना चाहीये. वस्तू स्वभाव जुगुप्सा जुग्नू चमकते त्याला पर्याय असु शकत नही जुगुप्सा वृत्ती जर प्राप्त होत असते तर सिद्धांत शास्त्र काय सांगते हे माहित होत नसते पण वृत्तीत बदल घडवत असतो तर ज्ञान वृद्धी चिकित्सक बुद्धी निर्माण होते. धर्म के प्रती शुद्ध भाव होकर समयक दृष्टी बन जाते है.🙏नमो जीनानम 🙏प्रणाम सर्वाना जैन युवा मंच महाराष्ट्र राज्य का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App https://primetrace.com/group/2874/post/1187278839?utm_source=android_post_share_web&referral_code=P6BRH&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=ADMIN ##जैन धर्म