#labbaik ya hussain कैलेंडर के पहले महीने मुहर्रम की 9वीं तारीख को 'तासुआ' (Tasuya) कहा जाता है। 9 और 10 मुहर्रम का रोज़ा (उपवास) रखना बहुत पुण्य (फजीलत) का काम माना जाता है। पैगंबर मुहम्मद ने मुसलमानों को अन्य धर्मों (यहूदियों) से अलग पहचान रखने के लिए 10 मुहर्रम (आशूरा) के साथ 9 मुहर्रम का भी रोज़ा रखने की हिदायत दी थी।
रोज़े की फजीलत (महत्व)पैगंबर की सुन्नत: पैगंबर मुहम्मद ने फरमाया था कि यदि मैं अगले साल तक जीवित रहा, तो मैं 9 मुहर्रम का भी रोज़ा अवश्य रखूंगा (ताकि सिर्फ 10 का रोज़ा न रहे)।