यह गीत एक संतान भक्त की अपनी माँ या ईश्वर से बिछड़ने की गहरी पीड़ा को दर्शाता है। कवि कहता है कि माँ ही उसका जीवन, सहारा और मार्गदर्शक थी और उनसे दूर होकर उसका जीवन दुखों से भर गया है वह महसूस करता है कि माँ के बिना जीवन अधूरा और निरर्थक है। दुनिया को वह स्वार्थ और मोह-माया से भरी बताता है तथा जीवन को क्षणभंगुर नश्वर मानता है। अंत में कवि अपने तन, मन और आत्मा को माँ के चरणों में समर्पित करने की इच्छा व्यक्त करता है माँ ईश्वर के प्रति प्रेम, विरह, जीवन की नश्वरता और पूर्ण समर्पण।आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, तड़पे तुझसे बिछडके मोर प्राण माई रे, #Tadpe Tujhse Bichhadke Mor Pran Mai Re , Writer ✍️ #Halendra Prasad,
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