प्रेम पावन प्रीत की प्यासी, पलक-पलक में पलता है,मन-मंदिर में मधुर मुस्कान बन, मौन सा ही चलता है।जैसे चाँद-चकोर की चाहत, जैसे सागर की गहराई,जैसे पवन की कोमल छुवन, जैसे फूलों की तरुनाई।प्रेम न केवल शब्दों में, संकल्पों में संवरता है,नयनों की नीरव भाषा में, चुपके-चुपके निखरता है।जैसे मीरा का मृदु समर्पण, जैसे राधा का अनुराग,जैसे दीपक की दृढ़ ज्योति, जैसे सूरज का उजियाग।जहाँ त्याग और विश्वास मिले, वही सच्चा बंधन है,जो खुद को खोकर भी पाए, वही प्रेम का वंदन है।..🙏*ॐ जय शनि महाराज*🕉 शं शनैश्चराय नमः🙏 जय शनिदेव ,,सुंदर शनिवार, नमस्ते सदा वत्सले, सनातन संस्कृति, हिंदू हिंदुस्तान
#🙏🏻शनिदेव भजन