अधराम मधुरम, वदनम मधुरम,
नयनम मधुरम, हसितम मधुरम।।
यानी मधुरता के स्वामी श्री कृष्ण का सब कुछ मधुर है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, महाप्रभु वल्लभाचार्य जी द्वारा रचित 'मधुराष्टकम्' के ये शब्द मन को असीम शांति प्रदान करते हैं। यह स्तोत्र हमें सिखाता है कि जब हम ईश्वर को प्रेम की दृष्टि से देखते हैं, तो हमें उनकी हर लीला और हर रूप में केवल मिठास ही नजर आती है।
जय श्री कृष्णा 🙏
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