देखो, पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएँ, और हम हैं भी।
(1 यूहन्ना 3:1)
पिता का प्रेम केवल शब्दों तक सीमित नहीं है; वह जीवनों को बदल देता है और हमें मसीह के द्वारा परमेश्वर की सन्तान होने की नई पहचान प्रदान करता है। यह प्रेम टूटे हुए, तिरस्कृत और पाप के बोझ से दबे लोगों तक पहुँचकर उन्हें दोषी ठहराने के बजाय अनुग्रह और करुणा प्रदान करता है।
इसका एक सुंदर उदाहरण हमें तब दिखाई देता है जब यीशु सामरिया की उस स्त्री से कुएँ पर मिले (यूहन्ना 4)। उसके पाँच पति हो चुके थे और वह उस समय ऐसे पुरुष के साथ रह रही थी जो उसका पति नहीं था। उसके जीवन पर पाप, लज्जा और सामाजिक अस्वीकृति की गहरी छाया थी। फिर भी यीशु ने उसे जीवन का जल दिया और उसकी गरिमा को पुनः स्थापित किया। उसका बदला हुआ जीवन ऐसी प्रभावशाली गवाही बन गया कि पूरे सामरी गाँव के बहुत से लोग मसीह पर विश्वास करने लगे। परमेश्वर के प्रेम के एक ही स्पर्श ने एक तिरस्कृत स्त्री को सुसमाचार की साक्षी बना दिया और एक पूरे समुदाय को प्रभु के पास ले आया।
आज वही प्रेम हमें भी परमेश्वर की सन्तान कहलाने का अधिकार देता है और हमें कृतज्ञता, पवित्रता तथा अपने स्वर्गीय पिता की अटल देखभाल पर पूर्ण विश्वास के साथ जीवन बिताने के लिए बुलाता है।
डॉ. जॉनसन चेरियन #😇 എന്റെ യേശു #✝ ബൈബിൾ വചനം #🙏🏼 ഭക്തി