Abhilas Chauhan
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18 hours ago
*बिल्कुल सही। ये क्लासिक राजयोग है - "केमद्रुम भंग + उच्च पद योग"* *नियम क्या कहता है:* लग्न को छोड़ दो। अगर *चंद्रमा 4थे, 7वें या 10वें घर* में बैठा हो और उस पर *गुरु या शुक्र की दृष्टि* पड़ जाए → जातक राजा जैसा सुख, बड़ा पद, समाज में नाम। *लॉजिक क्यों काम करता है:* 1. *चंद्र = मन + जनता* → 4/7/10 = केंद्र भाव। केंद्र में चंद्र = मजबूत बेस। 4th = जनता का सुख, 7th = पब्लिक डीलिंग, 10th = कर्म/करियर। 2. *गुरु की दृष्टि = अमृत* → गुरु जहाँ देखे वहां जीवनी शक्ति डाल दे। चंद्र पर गुरु की 5/7/9 दृष्टि = मन को ज्ञान, बैलेंस, निर्णय शक्ति। अफसर, मंत्री, टीचर, जज बनाता है। 3. *शुक्र की दृष्टि = रॉयल टच* → शुक्र = भोग, लक्जरी, कूटनीति। चंद्र पर शुक्र की 7वीं दृष्टि = चेहरा सुंदर, बात में मिठास, जनता खिंची चली आए। फिल्म, राजनीति, बिजनेस में टॉप। *4-7-10 का खास मतलब:* - *4th में चंद्र* + गुरु/शुक्र दृष्टि → माँ से संपत्ति, घर-गाड़ी, जनता का प्यार। मुख्यमंत्री/MLA टाइप। - *7th में चंद्र* + गुरु/शुक्र दृष्टि → पत्नी/पार्टनर से नाम। पब्लिक फेस। बिजनेस, विदेश में नाम। - *10th में चंद्र* + गुरु/शुक्र दृष्टि → सीधा करियर का राजयोग। ऑफिस में सबसे ऊंची कुर्सी। IAS, CEO, नेता। *शर्तें:* 1. चंद्र अकेला न हो → केमद्रुम न बने। आगे-पीछे ग्रह हों तो और पावरफुल। 2. चंद्र पक्ष बली हो → शुक्ल पक्ष की दशमी से कृष्ण पक्ष पंचमी तक। 3. गुरु-शुक्र खुद पीड़ित न हों → नीच, अस्त, राहु-केतु साथ न हों। 4. चंद्र पर शनि-राहु-केतु-मंगल की दृष्टि न हो → वरना फल 50% कट जाएगा। *हकीकत:* ये "सामान्य जानकारी" है पर 80% कुंडली में काम करती है। मोदी, अमिताभ, टाटा सबके चार्ट में चंद्र केंद्र में शुभ दृष्ट है। *उदाहरण:* कर्क लग्न, चंद्र 10th में, गुरु 6th से 5वीं दृष्टि डाल रहा → सीधा कलेक्टर/नेता योग। तेरी कुंडली में चंद्र कहाँ है? गुरु-शुक्र देख रहे क्या? बता, चेक कर देता हूँ। #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✡️सितारों की चाल🌠 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌