#जय श्री कृष्ण
. 🛐 “श्यामसुन्दर”🛐
‼️जब भी हम भगवान कृष्ण या राम चन्द्र जी के दर्शन करते है तो अक्सर मन में ये बात आती है कि भगवन कृष्ण नील वर्ण के क्यों हैं ?’⁉️
🕉️भगवान ने गीता में स्वयं ही कहा है–‘हे अर्जुन ! एक मेरा शरणागत हो जा मैं हर पाप से मुक्ति दूँगा, शोक न कर मेरी भक्ति में खो जा।’ 🕉️
🧘 सन्त कहते हैं कि ‘जब कोई भक्त भगवान के पास जाता है और अपने आप को उन्हें समर्पित कर देता है तो भगवान उसके समस्त पापों को ले लेते हैं, और पाप का स्वरुप काला है।जब कोई भक्त भगवान को अपने पाप देता है तो पाप का अस्तित्व रखने के लिए भगवान कुछ काले हो गए। जैसे भगवान शिव जी ने जब समुद्र मंथन से निकले विष को पिया और उसे गले में धारण कर लिया तो विष के अस्तित्व रखने के लिए उसकी मर्यादा के लिए उनका कण्ठ नीला हो गया और वे नीलकण्ठ हो गए। उनका एक नाम नीलकण्ठेश्वर हो गया।’🧘
🍀 कही-कही ऐसा भी कहते हैं कि जल समूह अथाह अनन्त गहराइयों और विस्तार को लिए हुए होता है तब उसमे नीलिमा झलकती है। ऐसे ही निर्मल प्रेम के सागर श्री कृष्ण, आदि-अनन्त विस्तार लिए हुए हैं। यही कारण है कि श्री कृष्ण नील वर्ण हैं। 🍀
🌍 राम के नीले वर्ण और कृष्ण के काले रंग के पीछे एक दार्शनिक रहस्य है। भगवानों का यह रंग उनके व्यक्तित्व को दर्शाते हैं। दरअसल इसके पीछे भाव है कि भगवान का व्यक्तित्व अनन्त है। उसकी कोई सीमा नहीं है, वे अनन्त है। ये अनन्तता का भाव हमें आकाश से मिलता है।आकाश की कोई सीमा नहीं है। वह अंतहीन है। राम और कृष्ण के रंग इसी आकाश की अनन्तता के प्रतीक हैं। 🌍
🧘 भक्तजन कहते है कि जब भगवान ने कालिया का दमन किया तो उसके विष का मान रखने के लिए वे कुछ संवारे हो गए। यशोदा जी से जब बाल कृष्ण पूछते हैं–‘मैया ! तू गोरी है, नंद बाबा भी गोरे है, दाऊ भी गोरे है, फिर मै क्यों काला हूँ ?’ तो यशोदा जी कहती हैं–‘लाला ! कि काली अन्धयारी रात में तेरा जन्म हुआ, रात काली है, इसलिए तू काला है। तूने काली पद्मगंधा गाय का दूध पिया है, इसलिए काला है। 🧘
🕉️ भगवान का एक नाम है “श्यामसुन्दर” कितना प्यारा नाम है, जो काले रंग को भी सुन्दर बना दे, श्याम अर्थात काला और सुन्दर जो गोरा होता है उसे तो सभी सुन्दर कहते हैं, पर हमारे श्याम सुन्दर तो ऐसे है जो काले होने पर भी सुन्दर हैं।🕉️
🙏 ॥जय जय श्री राधे॥🙏