#शिव पार्वती #🙏शिव पार्वती
प्रस्तुत दोहा शिव पुराण की उस प्रसिद्ध कथा पर आधारित है, जिसमें एक अनपढ़ और हिंसक शिकारी (व्याध) अज्ञानतावश महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा कर बैठता है। यह दोहा दर्शाता है कि महादेव की भक्ति के लिए पांडित्य की नहीं, बल्कि सरल हृदय और समर्पण की आवश्यकता होती है।
प्रसंग:
इस प्रसंग में उस क्षण का वर्णन है जब एक शिकारी शिकार की खोज में बेल के पेड़ पर रात भर जागता है। भूख और थकान के कारण वह अनजाने में बेल के पत्ते तोड़कर नीचे गिराता है, जो संयोग से नीचे स्थित शिवलिंग पर गिरते हैं। भगवान शिव उसकी इस अनजानी सेवा से ही प्रसन्न हो जाते हैं।
प्रथम पंक्ति: शिकारी का कोई उद्देश्य शिव पूजन का नहीं था, वह तो केवल पेड़ पर बैठकर शिकार का इंतजार कर रहा था। किंतु अनजाने में ही उसके हाथों से बिल्वपत्र (बेल के पत्ते) भगवान शिव के माथ (मस्तक/शिवलिंग) पर अर्पित हो गए। महादेव, जो अत्यंत भोले हैं, उन्होंने इस साधारण सी क्रिया को भी अपनी महान पूजा स्वीकार कर लिया।
द्वितीय पंक्ति: उस एक अनजानी भक्ति के प्रभाव से वह क्रूर शिकारी 'पावन परम' (अत्यंत पवित्र) हो गया। उसके जन्मों-जन्मों के पाप धुल गए और अंततः उसे 'जगत के नाथ' (शिव) के साक्षात् दर्शन और सान्निध्य प्राप्त हुआ.
हर हर महादेव
हर ओम् नमःशिवाय