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*l l श्रीहरिः l l* *“गीता जी की अलौकिक शिक्षायें”* *प्रश्न :- सुख लेने की इच्छा से हमें क्या नुकसान हुआ है ?* (15/09) *उत्तर* - सुख लेने की इच्छा से जो-जो भोग भोगे गये, उन-उन भोगों से *धैर्य नष्ट हुआ, ध्यान नष्ट हुआ, रोग पैदा हुए, चिन्ता हुई, व्यग्रता हुई, पश्चात्ताप हुआ, बेइज्जती हुई, बल गया, धन गया, शान्ति गयी एवं प्राय: दु:ख-शोक-उद्वेग आये* - ऐसा यह परिणाम विचारशील व्यक्तिके प्रत्यक्ष देखनेमें आता है। *'हमने भोगों को नहीं भोगा, भोगों ने ही हमें भोग लिया हमने तप नहीं किया, हम ही तप्त हो गये; काल व्यतीत नहीं हुआ, हम ही व्यतीत हो गये; तृष्णा जीर्ण नहीं हुई, हम ही जीर्ण हो गये।'* ( भर्तृहरिवैराग्यशतक ) भोगा न भुक्ता वयमेव भुक्तास्तपो न तप्तं वयमेव तप्ताः। कालो न यातो वयमेव यातास्तृष्णा न जीर्णा वयमेव जीर्णा: ।। ( भर्तृहरिवैराग्यशतक ) (गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित *श्रीमद्भगवद्गीता साधक -संजीवनी* पर आधारित) #🌙 शुभरात्रि 🌙 #🌙Good Night🌃 #🙏 प्रणाम 🙏 #😊प्रेरणा संग शुभकामना💐 #🥰प्यार भरी शुभकामनाएं💐