Shaileja Pagar
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24 days ago
अद्वैत विचार और कलियुग का अंतिम सत्य ​सागर की लहरों को देखें तो वे हज़ारों दिखाई देती हैं—कुछ बड़ी, कुछ छोटी। लेकिन यदि लहरों के पार जाकर देखें, तो वे केवल 'जल' ही हैं। लहर उत्पन्न हो तब भी जल, और विलीन हो जाए तब भी जल! हमारा जीवन भी वैसा ही है; हम उस अनंत परमात्मा रूपी सागर की एक छोटी सी लहर हैं। जब 'मैं' और 'तू' का भेद मिटता है और 'एकत्व' का भाव जागता है, तभी सच्चे अद्वैत ज्ञान का उदय होता है। सामने वाले हर रूप में स्वयं को ही देखना, यही असली भक्ति है और यही परम ज्ञान है। ​आज के इस बदलते समय में 'भविष्य मालिका' का उपदेश ही मार्गदर्शक है। 'मालिका' सत्य है और यही कलियुग का अंतिम सत्य है—कि अब परिवर्तन का समय आ चुका है। जब चारों ओर अंधकार और अशांति बढ़ेगी, तब केवल वही सुरक्षित बचेगा जो सत्य के मार्ग पर अडिग होगा। इस कठिन समय में स्वयं को सुरक्षित रखने और मानसिक शांति पाने का एकमात्र अचूक उपाय है—'त्रिसंध्या', 'श्रीमद्भागवत पठण' और निरंतर 'माधव' नाम का जप। त्रिसंध्या हमें हर प्रहर उस परमशक्ति से जोड़ती है, भागवत पठण हमें जीवन का सार समझाता है, और 'माधव' नाम का मधुर जप हमारे हृदय के अंधकार को मिटाकर हमें निर्भय बनाता है। कलियुग के इस अंतिम चरण में केवल नाम-स्मरण और अद्वैत भाव ही हमारी नैया पार लगाएगा। याद रखें, लहरें आती-जाती रहेंगी, लेकिन 'माधव' रूपी सागर सदैव स्थिर और सत्य है। जो इस सत्य को थामे है, वह अचल है। #💪बुद्धांची तत्वे📜 #🎭Whatsapp status #✍ज्ञानेश्वरी📖 #😇भक्ती स्टेट्स #🌻आध्यात्म 🙏