*आ वास्तविकता सत्वे दृष्टिपथं क्व चैति वै।*
*वक्तुं तमो हि शक्नौति कः कुत्र चास्ति तारकः।।*
*अर्थः-*
उजाले में हर असलियत कहां नजर आती है। अन्धेरा ही बता सकता है कि सितारा कौन और कहां है।
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