अज़नबी
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1 days ago
आईस्ता आईस्ता शामों की तरह जिंदगी ढल जायेगी... किसको मालूम किसके हिस्से मे "रजाये खैर आयेगी... यूँ तो मालूम है मर जाना है हम सबने एक दिन.... सवाल ये है कि मौत कौन से सकल मे आयेगी.... बेहतर है कि मर जाये जवानीे मे हम... वरना कम्बख्त हमसे ये और गुनाह करायेगी.... #💝 शायराना इश्क़ #📚कविता-कहानी संग्रह #💓 मोहब्बत दिल से #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍मेरे पसंदीदा लेखक