Saba Parveen
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4 days ago
तलब चाहे दर्द की हो या चाय की बेहिसाब होती है लोग चुस्की में चाय पीते हैं और हम सिप सिप करके गमों का मज़ा लेते हैं चाय कड़क होती है तो हर थकान उतर जाती हैं गम रंग लेते हैं तो हद हर एक खत्म होती है चाय की गर्माहट जहां दर्द खींच लेती है गमों की गर्मियां भी अश्क सोख लेती है मै चाय और ग़मों से बराबर का इश्क़ रखती हूं चाय के कप संग में गमों की राख रखती हूं। Saba Parveen दिल से दिल तक ❤️🧡❤️🧡 #💓 मोहब्बत दिल से