#परमात्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
त्रेतायुग में कबीर परमेश्वर 'मुनीन्द्र' ऋषि के रूप में प्रकट हुए और नल-नील को अपनी शरण में लिया। जब रामचंद्र जी को सीता जी को रावण की कैद से मुक्त कराने के लिए समुद्र पर पुल बनाना था, तब मुनीन्द्र ऋषि के रूप में कबीर जी ने ही वह पुल बनवाया था:
धन-धन सतगुरु सत कबीर, भक्त की पीर मिटाने वाले।
रहे नल-नील यत्न कर हार, तब सतगुरु से करी पुकार।
जा सत रेखा लिखी अपार, सिंधु पर शिला तिराने वाले।।
अधिक जानकारी के लिए देखें सत्संग शाम को 7, 30 साधना चैनल पर प्रसारित
##विश्व_शुभचिंतक_संतरामपालजी