"लिशा.! तुम? और इसके साथ???" शौर्य ने अपनी कडी नजरें लिशा और युवराज पर गाड़ते हुए कड़क आवाज़ में सवाल किया।
युवराज ने अब जाकर शौर्य को गौर से पहचाना, और उसके दिमाग में भी पाच साल पुराना वह बीता हुआ कल घूम गया।
"अ. हाँ शौर्य! कैसे हो तुम?" लिशा ने अपनी घबराहट छुपाते हुए, चेहरे पर जबरदस्ती मुस्कान लाने की कोशिश की।
"वो सब छोड़ो! ये युवराज तुम्हारे साथ क्या कर रहा है? ये तो पांच साल पहले अदिति के साथ था ना?" शौर्य का यह सीधा सवाल सुनते ही लिशा का मानो गला ही सुखा पड गया।
उसे तो लगा था पाच साल में शौर्य शायद अदिति को भूल चुका होगा, लेकिन यहाँ तो कहानी कुछ और ही थी।
अब लिशा टेंशन में युवराज की तरफ देख रही थी, और युवराज गहरी उलझन में लिशा को निहार रहा था।
"लिशा! मैंने तुमसे कुछ पूछा.. जवाब दो! और तुम.. तुम पांच साल पहले अदिति को डेट करते थे ना? तो अब इसके साथ यहाँ क्या कर रहे हो तुम.??" शौर्य ने युवराज पर अपनी अंगार भरी नजरे तेरते हुये पूछा।
शौर्य के इस तेवर से युवराज पूरी तरह घबराया और उलझन में पड़ गया।
तभी शौर्य की नजर लिशा के गले के मंगलसूत्र और सिंदूर पर ठहेर गई। उसने दाँत भींचते हुए पूछा.. "लिशा, तुमने शादी कर ली? कहीं... कहीं तुमने इसके साथ तो शादी नहीं कीं है??" शौर्य का यह सटीक अंदाजा सुनते ही लिशा कलेजा मुंह में आया.।
क्यू कीं शौर्य ने बिल्कुल अचूक निशाना साधा था।
"लिशा..कुछ बोलोगी तुम या मैं!" शौर्य अब गुस्से से लाल होते हुये जोर से चीख पड़ा।
उसका गुस्सा देखकर युवराज तुरंत लिशा को संभालने के लिए आगे बढा। "शौर्य देखो! तुम लिशा पर इस तरह मत चिल्लाओ। इसमें लिशा की कोई गलती नहीं है." युवराज ने सामने आकर शौर्य को शांत करने की कोशिश की।
"ओह, अच्छा! तो फिर तुम ही बताओ युवराज. तुम अदिति और पिहू को छोड़कर इसके साथ यहाँ क्या कर रहे हो??" शौर्य ने अपने होंठ चबाते हुए, जलती आँखों से युवराज को घूरकर सवाल दागा।
सामने खड़ा युवराजने जैसे ही पिहू नाम सुना, वह गहरी सोच में पड़ गया। क्योंकि ५ साल पहले उस ड्रामे के बाद अदिति के साथ जो भयानक हादसा हुआ, यह युवराज को बिल्कुल नहीं पता था। लेकिन लिशा को सब मालूम था।
"देखो शौर्य, तुम क्या बोल रहे हो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा.और अदिति.!" युवराज आगे कुछ और बोलने ही वाला था कि तभी लिशा ने झटके से उसका हाथ दबा दिया और आँखों से इशारा करते हुए उसे कुछ भी बताने से मना किया.. क्यू कीं अदितीने शौर्य को कुछ भी न बताने कीं कसम दी थी लिशा को।
युवराज ने लिशा की तरफ देखा और अपनी नजरें उस पर टिकाते हुए दृढ़ आवाज़ में कहा..
"लिशा, तुम चुप रहो! अब हम दोनों की शादी हो चुकी है, और इस वक्त शौर्य से सच छुपाना बिल्कुल गलत होगा!"
युवराज कीं ये बात सुनते ही शौर्य की भौहें बुरी तरह से सिकुड़ गईं। उसने जान लिया था.. जरूर दाल में कुछ काला है।
"गुड, युवराज...! बता दो मुझे, क्या है सच?" शौर्य ने गहरी सांस लेते हुए कहा।
युवराज ने लिशा से अपनी नजरें हटाईं, और सामने खड़े शौर्य की आँखों में आँखें डालकर बोलना शुरू किया...
"शौर्य... पांच साल पहले हमने जो कुछ भी किया, वह सब सिर्फ और सिर्फ अदिति के कहने पर किया था। मैं तो कॉलेज के दिनों से ही लिशा से प्यार करता था।
उस दिन लिशा के कहने पर, मैं सिर्फ एक दिन के लिए अदिति का बॉयफ्रेंड बनने का नाटक करने आया था... ताकि तुम उससे दूर हो जाओ। उस दिन के बाद, ना मैं कभी अदिति से मिला और ना ही वह कभी मेरे सामने आई...!" युवराज ने सच्चाई बेहद शांती से बयां करी।
"व्हाट...????" शौर्य का दिमाग यह सुनकर पूरी तरह घूम गया। उसने हैरान होकर पूछा, "तो... तो फिर पिहू...?? पिहू किसकी बेटी है??"
"शौर्य, वो तो मुझे भी नहीं पता!" युवराज ने बेबसी से कहा।
"लिशा... क्या तुम्हें कुछ पता है इसके बारे में??" शौर्य ने अब बिजली जैसी कड़कती नजरें लिशा पर टिका दीं।
"शौर्य... मुझे सच में कुछ नहीं पता!" लिशा अब डर के मारे हकलाते हुए पाच साल पुरानी हकीकत बताने लगी..
"मुझे तो बस अदिति ने हेल्प मांगी थी... उसने मुझसे पूछा था कि क्या युवराज सिर्फ एक दिन के लिए उसका बॉयफ्रेंड होने का नाटक कर सकता है क्या? और मैंने उसकी हेल्प कीं बस्स इससे ज्यादा मुझे कुछ भी मालूम नहीं है...."
"इसका मतलब... तुम्हारा और अदिति का कोई रिश्ता नहीं था, और पिहू तुम्हारी बच्ची नहीं है...???" शौर्य ने युवराज की तरफ देखते हुए दोबारा पक्का किया।
"नहीं शौर्य, बिल्कुल नहीं! मैंने कहा ना... उस दिन के बाद वह कहाँ चली गई, उसने वह सारा ड्रामा क्यों रचा... मुझे इसके बारे में कुछ भी मालूम नहीं है!" युवराज ने पूरी ईमानदारी से कहा।
"लिशा, तुम्हें कुछ पता है? क्या अदिति ने किसी और से तो शादी नहीं कीं??" शौर्य ने आखिरी उम्मीद से पूछा।
"नहीं शौर्य... वह पहले भी अपनी ज़िंदगी में बिल्कुल अकेली थी... और आज भी वह एकदम अकेली है!" लिशा के सब्र का बांध टूटा और वह रोते-रोते सच बोल पड़ी।
तभी शौर्य के चेहरे पर एक अजीब सी चमक दौड़ गई। उसकी आँखें भर आईं, लेकिन इस बार उन आँखों में सुकून था। उसने मन ही मन कहा..
'इसका मतलब... आज भी मेरी आदू सिर्फ और सिर्फ मेरी है!'
फिर शौर्य ने लिशा और युवराज की तरफ देखा और कहा, "इट्स ओके... उसने यह सब क्यों किया, इसका पता मैं अब खुद लगा लूँगा। थैंक्स लिशा और युवराज... तुम दोनों से मिलकर आज आधी से ज़्यादा सच्चाई मेरे सामने आ गई है!"
यह बोलकर शौर्य एक पल भी वहाँ नहीं रुका और तेज़ी से होटल से बाहर निकल गया..
अपने दिल में एक नई उम्मीद और अदिति के उस झूठ की वजह ढूँढने का पक्का इरादा लिए...
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